गजल : फिर हाँका हुआ है
º -----फिर हाँका हुआ है----- फिर हाँका हुआ है, फिर भरमाया जाएगा हमें, चुनाव में जबरिया ...
mohanlal rawal द्वारा 13 अक्टूबर, 2008 9:11:00 PM IST पर पोस्टेड
गीत : राष्ट्रभाषा महान है .
-------- राष्ट्रभाषा महान है -------- भारत की पहचान है राष्ट्रभाषा महान है . संस्कृत का अवतार है, ...
mohanlal rawal द्वारा 14 सितंबर, 2008 5:38:00 PM IST पर पोस्टेड
कविता : ओ ! मैकाले के मानस-पुत्रो !
ओ ! मैकाले के मानस-पुत्रो ! ! तुमने काट डाली करोड़ों जिह्वाएँ, क्योंकि, तुम्हें अँदेशा था कि- करोड़ो ...
mohanlal rawal द्वारा 11 सितंबर, 2008 2:08:00 AM IST पर पोस्टेड
गीत: यह कैसी आजादी ?
mohanlal rawal द्वारा 14 अगस्त, 2008 12:05:00 AM IST पर पोस्टेड
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व्यंग्य : हिंदी दिवस: व्यथा-कथा .
कहने को तो 14 सितम्बर हिंदी दिवस है, पर अपने लिए तो चाँदी दिवस है . वैसे तो, अपने को कोई पूछता नही, ...
mohanlal rawal द्वारा 19 सितंबर, 2008 3:04:00 PM IST पर पोस्टेड
रोमन लिपि के शिकंजे में सिसकती हिंदी .
सरलता और सहजता के नाम पर हिंदी को रोमन लिपि में लिखने का षड़्यंत्र रचा जा रहा है. हिंदी को रोमन लिपि ...
mohanlal rawal द्वारा 2 सितंबर, 2008 11:52:00 AM IST पर पोस्टेड
गुलामी के लिए अँग्रेजी की बेड़ियों की आराधना क्यों ?
----- भारत में अँग्रेजी के माध्यम से साँस्कृतिक परिवर्तन -------- जब कोई देश विजेता बनता हे तो वह ...
mohanlal rawal द्वारा 24 अगस्त, 2008 5:21:00 PM IST पर पोस्टेड
भूमंडलीकरण और हिंदी का संरक्षण
आज के इस संघर्षपूर्ण माहोल में भूमंडलीकरण के नाम पर पूंजीवादी शक्तियाँ भारत के लोगों का आर्थिक शोषण ...
mohanlal rawal द्वारा 27 जुलाई, 2008 11:25:00 PM IST पर पोस्टेड
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