हो गए शिथिल आज सभी अनुबंध,मधुमास की बयार में महका मकरंद्,भेज रहा है दिवस प्यार भरी पातीरजनी को भी है नींद कहाँ आती,चाँदनी चूनर रह-रह के खिसक जाती,अंतस में प्यार की पीर कसमसाती,खुल-खुल जा रहे हैं, कसे हुए बंध,मधुमास की बयार में महका मकरंद्.भेज दिए ...
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