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टैग्स: वसंत


ब्लॉग्स (2)
वसंतवासंती हवा के गुदगुदाने पर भी तुम नहीं हँसते।लाखों फूलों के रंग तुम्हारी आँखों में नही रचते।कोयल के मधुर गीत तुम्हें सम्मोहित नहीं करते।वासंती उत्सव में भी तुम्हारे पाँव नहीं थिरकते। तो सच में तुम मनुष्य नहीं कोई अज्ञात प्राणी हो।SpringVernal air ... आगे पढ़ें...

> ------ वसंत ‌‌‌----जंगल में महक उठी आज पुरवैया, मनवा में चहक उठी सोन चिरैया .रुप तेरा बन गया तरुओं के किसलय, तैरी हँसी ने है फूल खिलाएँ, महुआ की सुगंध में तेरी ही सुगंध रची, टेसू ने अधरों के रंग चुराए, तो.धीरज की डगमग होने लगी नैया मनवा में ... आगे पढ़ें...