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ब्लॉग्स (2)
वसन्त
वसंतवासंती हवा के गुदगुदाने पर भी तुम नहीं हँसते।लाखों फूलों के रंग तुम्हारी आँखों में नही रचते।कोयल के मधुर गीत तुम्हें सम्मोहित नहीं करते।वासंती उत्सव में भी तुम्हारे पाँव नहीं थिरकते। तो सच में तुम मनुष्य नहीं कोई अज्ञात प्राणी हो।SpringVernal air ...
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mohanlal rawal
द्वारा 25 फ़रवरी, 2012 4:32 PM पर पोस्टेड
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हिंदी गीत : वसंत
> ------ वसंत ----जंगल में महक उठी आज पुरवैया, मनवा में चहक उठी सोन चिरैया .रुप तेरा बन गया तरुओं के किसलय, तैरी हँसी ने है फूल खिलाएँ, महुआ की सुगंध में तेरी ही सुगंध रची, टेसू ने अधरों के रंग चुराए, तो.धीरज की डगमग होने लगी नैया मनवा में ...
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प्रतिक्रियाएँ[1] |
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mohanlal rawal
द्वारा 30 जनवरी, 2009 9:45 PM पर पोस्टेड
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