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टैग्स: प्रकृति


ब्लॉग्स (7)
वसंतवासंती हवा के गुदगुदाने पर भी तुम नहीं हँसते।लाखों फूलों के रंग तुम्हारी आँखों में नही रचते।कोयल के मधुर गीत तुम्हें सम्मोहित नहीं करते।वासंती उत्सव में भी तुम्हारे पाँव नहीं थिरकते। तो सच में तुम मनुष्य नहीं कोई अज्ञात प्राणी हो।SpringVernal air ... आगे पढ़ें...

लक्ष्मण रेखाज्योति जैनये रही तुम्हारी लक्ष्मण रेखा !धनुष की प्रत्यंचा के समान स्वर खींचा,और जो इसे पार कर के देखा,तो समझो देनी पड़ेगी अग्नि परीक्षा.वाह रे आधुनिक मर्यादा पुरुषोत्तम !तुम्ही हो आज के राम लक्ष्मण !कहाँ चला जाता है वह पौरुष तुम्हारा,जब स्वयं ... आगे पढ़ें...

वजूद डा. जयश्री बंसलसोना, संसार की सबसे मँहगीधातु है माना,लगभग सभी स्त्रियों को यह्,ख़ुद से भी प्यारा है, चमक इसकी चुँधिया देती है,आँखों को लंबे समय तक्,मगर मुझे लगा,सोने से कील नहीं गाड़ी जा सकतीदीवार पर यदि कुछ टाँगना हो,तलवार नहीं बन सकती है,धर्म रक्षा ... आगे पढ़ें...