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ब्लॉग्स (6)
हिन्दी कविता : डा. पद्मासिंह - माँ तुम बहुत याद आती हो!
माँ तुम बहुत याद आती हो माँ मेरे सपनों को तुमने ही दिया था अर्थभली बुरी दुनिया मेंजीने का हौसला बताया था तुमने ही बदल सकता है सब कुछअगर हम ठान लेंभीतर छिपी आग और काटनेवाली धार होती हैऔरत के जिगर में बस ! पहचान नहीं होती उसेख़ुद की हीतुमने ही तो बताया ...
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mohanlal rawal
द्वारा 6 अगस्त, 2011 1:28 AM पर पोस्टेड
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हिंदी कविता : डा. पद्मा सिंह : रोशनी का दरख्त
रोशनी का दरख्त एक घुड़्सवार लगातार कर रहा है यात्रा एक मछली तैर रही हैसतह पर अनिवारलगातार शून्य से एकालापकभी ना खत्म होने वाला इंतज़ारनहीं !कोई नहीं हैफिर भी लगता हैअभी-अभी कोईगुजर गया है छूकर !हर मनुष्य के भीतरसमाया है ब्रह्मांडनदी पहाड़इंद्रधनुष के ...
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mohanlal rawal
द्वारा 15 मई, 2009 5:43 PM पर पोस्टेड
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हिंदी कविता : कवि : मणि खेड़ेकर
हम पतझड़ के सूखे पान !आई आँधी उड़ जाएँगे ना कोई ठौर ठिकान !मजबूरी का जीवन जीतेकड़वाहट के आँसू पीतेफिर भी औठों पर मुस्कान !खानदान के नाज़ थे हमबच्चों की परवाज थे हम अब सूनापन बीयाबान ! जाने कब तक और जीयेंगे दिन में कितनी बार मरेंगे टूट रहा है स्वाभिमान ...
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mohanlal rawal
द्वारा 25 अप्रैल, 2009 11:13 PM पर पोस्टेड
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