लोक-युद्धशंख फूंके जा रहे हैंरणभेरियों से गूँज रहा है आसमानदुर्योधन की चंडाल-चौकड़ीउन्मत्त है युद्ध के लिएशकुनी फेंक रहा है पासेहस्तिनापुर के सिंहासन के लिए।दुःशासन के कुचक्र ने निस्तेज कर दिया है पांडवों को शरशय्या पर लेटे हैं युधिष्ठिरआज कृष्ण भी भोगी ...
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