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ब्लॉग्स (19)
वसंतवासंती हवा के गुदगुदाने पर भी तुम नहीं हँसते।लाखों फूलों के रंग तुम्हारी आँखों में नही रचते।कोयल के मधुर गीत तुम्हें सम्मोहित नहीं करते।वासंती उत्सव में भी तुम्हारे पाँव नहीं थिरकते। तो सच में तुम मनुष्य नहीं कोई अज्ञात प्राणी हो।SpringVernal air ... आगे पढ़ें...

दीप जले जग ज्य़ोतिर्मय हो गया,फूल खिले जग पुष्पित हो गया,तुम मिले आनंद सृजित हो गया मोहन रावल आगे पढ़ें...

लोक-युद्धशंख फूंके जा रहे हैंरणभेरियों से गूँज रहा है आसमानदुर्योधन की चंडाल-चौकड़ीउन्मत्त है युद्ध के लिएशकुनी फेंक रहा है पासेहस्तिनापुर के सिंहासन के लिए।दुःशासन के कुचक्र ने निस्तेज कर दिया है पांडवों को शरशय्या पर लेटे हैं युधिष्ठिरआज कृष्ण भी भोगी ... आगे पढ़ें...