महान आश्चर्य है कि भारत सरकार के मंत्रिगण बाबा रामदेव की मांग स्वीकार करने को तैयार हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं का माध्यम हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं होंगी. देर आयद दुरुस्त आयद. क्या मांगे मानने का यही तरीका अच्छा लगा! चलो अच्छा लगा की हिंदी और भारतीय ... आगे पढ़ें...
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हिंदी के लिए उपराष्ट्रपति के पद की भी परवाह नहीं-जहाँ आज के युग में सत्ता और संपत्ति ही सब कुछ है, वहाँ नेपाल के उपराष्ट्रपति श्रीपरमानंद झा जैसे आदर्श पुरुष भी हैं ,जिन्होंने हिंदी के लिए अपने पद की भी परवाह नहीं की और अपना सब कुछ हिंदी के लिए दाँव पर ... आगे पढ़ें...
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हिंदी संरक्षण संघ विश्व में सर्वाधिक बोली जानेवाली भाषा में हिंदी का स्थान तीसरा है, फिर हिंदी का संरक्षण किस बात का? और क्यों? यह प्रश्न उठना बहुत स्वाभाविक है। विगत वर्षों मे हिंदी का प्रसार बहुत तेजी से हुआ है। हिंदी, अंग्रेजी का विकल्प बनने ... आगे पढ़ें...
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 >रवि रतलामी इंदौर में.21 मार्च 2009 को श्री रवि रतलामी ने मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति में ब्लाग तथा हिंदी ब्लाग लेखन की समस्याओं पर सेमिनार में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया. पद्मा की रचनाएं शीर्षक से ब्लाग बनाकर ,ब्लाग बनाना सिखाया.उन्होंने कहा कि गत ... आगे पढ़ें...
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 -मैं तुम्हारी बेटी हूँ माँ सिर्फ़ भ्रूण नहीं कवयित्री : डा. पद्मा सिंह , कृति :शब्द की हथेलियों मेंदवाओं की जहरीली गंध, और, ठंडे सफेद औजार, मुझे, डर लग रहा है, माँ ! मैं चीखना चाहती हूँ मैं जानती हूँ, तुम्हें मेरी जरूरत नहीं है मगर्, यह भी तो सच है ना, ... आगे पढ़ें...
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हो गए शिथिल आज सभी अनुबंध,मधुमास की बयार में महका मकरंद्,भेज रहा है दिवस प्यार भरी पातीरजनी को भी है नींद कहाँ आती,चाँदनी चूनर रह-रह के खिसक जाती,अंतस में प्यार की पीर कसमसाती,खुल-खुल जा रहे हैं, कसे हुए बंध,मधुमास की बयार में महका मकरंद्.भेज दिए ... आगे पढ़ें...
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------संसद में राजभाषा हिंदी की स्थिति -------विगत दिनों बजट सत्र के प्रारंभ के अवसर पर महामहीम राष्ट्रपति का अंग्रेजी में सारगर्भित एवं प्रेरक उदबोधन हुआ. जिसे सबने सराहा. उसी भाषण के प्रारंभिक और अंत के कुछ अंश माननीय उप-राष्ट्रपति जी ने ... आगे पढ़ें...
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 कहने को तो 14 सितम्बर हिंदी दिवस है, पर अपने लिए तो चाँदी दिवस है . वैसे तो, अपने को कोई पूछता नही, पर हिंदी दिवस के लिए अपन दो-चार भाषण कबाड़ लेते हैं, तो अपनी पूछ परख हो जाती है. उसके लिए भी साल भर जुगाड़ करना पड़्ता है. सरकारी उपक्रमों तथा आकशवाणी ... आगे पढ़ें...
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 सरलता और सहजता के नाम पर हिंदी को रोमन लिपि में लिखने का षड़्यंत्र रचा जा रहा है. हिंदी को रोमन लिपि में लिखना अवैज्ञानिक ही नही बल्कि अंग-भंग और बलात्कार करने जैसा घिनौना कर्म है. रोमन में हिंदी , वैसी ही लगती है, जैसे किसी भारतीय महिला को साड़ी के स्थान ... आगे पढ़ें...
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 ----- भारत में अँग्रेजी के माध्यम से साँस्कृतिक परिवर्तन --------जब कोई देश विजेता बनता हे तो वह अपनी संस्कृति विजीत देश पर थोपने के लिए भाषा का सहारा लेता है. यही कारण है कि मुगलों ने फारसी और अँग्रेजों ने अँग्रेजी को हमारे देश पर लादा. भारत की भाषायी ... आगे पढ़ें...
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 आज के इस संघर्षपूर्ण माहोल में भूमंडलीकरण के नाम पर पूंजीवादी शक्तियाँ भारत के लोगों का आर्थिक शोषण कर रही है. देश के विकास के नाम पर उच्चवर्ग के लोगों का विकास किया जा रहा है. गरीब जनता के पास न तो रोजगार है और न ज्ञान है, क्योंकि अँग्रेजी की अनिवार्यता ... आगे पढ़ें...
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