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चैनल: हिंदी साहित्य , हिंदी साहित्यकार, हिंदी कृतियाँ


ब्लॉग्स (6)
माँ तुम बहुत याद आती हो माँ मेरे सपनों को तुमने ही दिया था अर्थभली बुरी दुनिया मेंजीने का हौसला बताया था तुमने ही बदल सकता है सब कुछअगर हम ठान लेंभीतर छिपी आग और काटनेवाली धार होती हैऔरत के जिगर में बस ! पहचान नहीं होती उसेख़ुद की हीतुमने ही तो बताया ... आगे पढ़ें...

रोशनी का दरख्त एक घुड़्‌‌‌‌सवार लगातार कर रहा है यात्रा एक मछली तैर रही हैसतह पर अनिवारलगातार शून्य से एकालापकभी ना खत्म होने वाला इंतज़ारनहीं !कोई नहीं हैफिर भी लगता हैअभी-अभी कोईगुजर गया है छूकर !हर मनुष्य के भीतरसमाया है ब्रह्मांडनदी पहाड़इंद्रधनुष के ... आगे पढ़ें...

हम पतझड़ के सूखे पान !आई आँधी उड़ जाएँगे ना कोई ठौर ठिकान !मजबूरी का जीवन जीतेकड़वाहट के आँसू पीतेफिर भी औठों पर मुस्कान !खानदान के नाज़ थे हमबच्चों की परवाज थे हम अब सूनापन बीयाबान ! जाने कब तक और जीयेंगे दिन में कितनी बार मरेंगे टूट रहा है स्वाभिमान ... आगे पढ़ें...

लक्ष्मण रेखाज्योति जैनये रही तुम्हारी लक्ष्मण रेखा !धनुष की प्रत्यंचा के समान स्वर खींचा,और जो इसे पार कर के देखा,तो समझो देनी पड़ेगी अग्नि परीक्षा.वाह रे आधुनिक मर्यादा पुरुषोत्तम !तुम्ही हो आज के राम लक्ष्मण !कहाँ चला जाता है वह पौरुष तुम्हारा,जब स्वयं ... आगे पढ़ें...

वजूद डा. जयश्री बंसलसोना, संसार की सबसे मँहगीधातु है माना,लगभग सभी स्त्रियों को यह्,ख़ुद से भी प्यारा है, चमक इसकी चुँधिया देती है,आँखों को लंबे समय तक्,मगर मुझे लगा,सोने से कील नहीं गाड़ी जा सकतीदीवार पर यदि कुछ टाँगना हो,तलवार नहीं बन सकती है,धर्म रक्षा ... आगे पढ़ें...

-मैं तुम्हारी बेटी हूँ माँ सिर्फ़ भ्रूण नहीं कवयित्री : डा. पद्मा सिंह , कृति :शब्द की हथेलियों मेंदवाओं की जहरीली गंध, और, ठंडे सफेद औजार, मुझे, डर लग रहा है, माँ ! मैं चीखना चाहती हूँ मैं जानती हूँ, तुम्हें मेरी जरूरत नहीं है मगर्, यह भी तो सच है ना, ... आगे पढ़ें...