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चैनल: हिंदी गीत : प्रेम और प्रकृति


ब्लॉग्स (5)
शब्द कब महकने लगे ?कवि : मोहन रावल शब्द कब महकने लगे ,कुछ कह नहीं सकते,क्योंकि, उनका कोई मौसम नहीं होताहां ! यह देखा गया है किजब, अनुराग की बासंती बयार बहती हो,तब, शब्द महकने लगते हैं कभी -कभी कोई वयक्तित्व शब्दों का आकर ले कर अन्य व्यक्ति से एकाकार हो ... आगे पढ़ें...

हो गए शिथिल आज सभी अनुबंध,मधुमास की बयार में महका मकरंद्,भेज रहा है दिवस प्यार भरी पातीरजनी को भी है नींद कहाँ आती,चाँदनी चूनर रह-रह के खिसक जाती,अंतस में प्यार की पीर कसमसाती,खुल-खुल जा रहे हैं, कसे हुए बंध,मधुमास की बयार में महका मकरंद्.भेज दिए ... आगे पढ़ें...

वासंती मौसम आता हैकवि : मोहन रावल--वासंती मौसम आता है---जब मन में मिश्री घुलती है,जब देह भी रंग बदलती है,आँखों में सपने पलते हों,दर्द के शिखर पिघलते हों,जब हर कोई मन को भाता होवासंती मौसम आता है.जब खेतों में लहरें चलती है,हर कली में गंध मचलती है,किसलय पर ... आगे पढ़ें...

सरस्वती वंदनाअर्चन करें, वंदन करें माँ,आज तेरे द्वार पर भावना के स्वर गूँजे जिंदगी की सितार पर अर्चन करें वंदन करें..शब्द की शक्ति तू ही है अर्थ की अभिव्यक्ति तू सप्त स्वर हैं नृत्य करते तेरी वीणा के तार पर अर्चन करें वंदन करें...राष्ट्र का ... आगे पढ़ें...

> ------ वसंत ‌‌‌----जंगल में महक उठी आज पुरवैया, मनवा में चहक उठी सोन चिरैया .रुप तेरा बन गया तरुओं के किसलय, तैरी हँसी ने है फूल खिलाएँ, महुआ की सुगंध में तेरी ही सुगंध रची, टेसू ने अधरों के रंग चुराए, तो.धीरज की डगमग होने लगी नैया मनवा में ... आगे पढ़ें...