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चैनल: हमारी हिंदी सबकी ...


ब्लॉग्स (6)
--- गरीबों का आजादी-पर्व--मुफलिसों की चिट्ठी शहीदों के नाम है,देश तो स्वतंत्र है, पर, हम गुलाम हैं .अंगार पर चले हम,मझधार पर पले हम,रोशन हो देश अपना, मशाल-सा जले हम,पर व्यर्थ गई कुर्बानी,हर आँख में है पानी,बलिदानियों का कैसा हुआ अंजाम है?देश तो स्वतंत्र ... आगे पढ़ें...

धर्म के ज्वलामुखी जब धधकते हैं तब, मानवता अपना अस्तित्व खो देती है. लोग खून के प्यासे ही नहीं होते, अपितु, सब कुछ ध्वंस कर विजेता के रूप में अट्टहास करना चाहते हैं. आज धार्मिक व्यक्ति मिलना मुश्किल है, पर्, धार्मिक सेनाएँ मिल जाएगीं. धर्म के नाम पर नेता ... आगे पढ़ें...

सामाजिक और राजनीतिक जीवन का भविष्य होता नही, बनाया जाता है. विश्व के बुद्धिमान और शक्तिशाली राष्ट्र अपने हिसाब से दुनिया का भविष्य लिख रहे है. योजनाबद्ध तरीके से किसी देश में साँ‌स्कृतिक परिवर्तन कर, अपना अनुगामी, लाभ लेने के लिए बनाया जा रहा है. यदि कोई ... आगे पढ़ें...

मैं अपने अंतस में,आकाश की अनुभूति करने लगा हूं . अपनी आंखों से अदृश्य को देखने लगा हूँ .मुझे सुखद लगता है, भावनाओं का असीम ब्रह्मांड. मेरी जिजीविषा से मृत्यु, हास्यास्पद बन गई है.और आनंद का केसेट, पूरे जोर से बजता है. अंतस को प्रिय हो गया परिवर्तन, होने ... आगे पढ़ें...

राष्ट्रभाषा को अपनाना होगा, हमें सच्चा गणतंत्र लाना होगा.देश की पहचान हिंदी,देश की है शान हिंदी,झोंपड़ी का मान हिंदी,गरीबों का अरमान हिंदी,हिंदी को सम्मान दिलाना है,हमें सच्चा गणतंत्र लाना है. वीरगाथा गाने वाली, भक्तिरस बहाने वाली, शृंगार को महकाने वाली, ... आगे पढ़ें...

लोग संवेदनाहीन होकर जीते हैं, न अमृत, न विष, बस पानी पीते हैं. सुबह कुछ झर रहा था अंजुरी से,शाम को देखा तो हाथ रीते हैं.दिन भर फाडी उन्होंने अपनी जेबें, रात को फिर मजबूर होकर सीते हैं.जिंदगी बढ़ती जाती पर लोग ठहरे हैं, जिंदगी लोग क्यों मर कर जीते हैं ... आगे पढ़ें...