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हिंदी गीत : प्रेम और प्रकृति (5)
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प्रकृति उस अनंत की प्रतिकृति है. प्रेम, प्रकृति और ब्रह्मांड के रचयिता की अनुभूति है. प्रेम सहज और स्वाभाविक होता है तथा हमें विस्तार देता है.
मोहन रावल |
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हिंदी : साहित्य - समाचार : गतिविधियाँ (6)
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साहित्य जीवन की अभिव्यक्ति है. समाज साहित्य में प्रतिबिंबित होता है. अत: समाज के सदस्यों को आईना दिखाना जरूरी है. इसी उद्देश्य से इस चैनल को प्रस्तुत किया जारहा है.अपनी प्रतिक्रिया प्रेषित करें.
मोहन रावल |
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