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ब्लॉग्स (13)
º‌‌‌ -----फिर हाँका हुआ है-----फिर हाँका हुआ है, फिर भरमाया जाएगा हमें,चुनाव में जबरिया वोट-प्रसव कराया जाएगा हमें . तुम हिंदू हो, वे मुसलमान हैं, वे बताते हैं हमको,बंदर-चाल है, बिल्लियों-सा लड़ाया जाएगा हमें. पाँच साल तक तो दुत्कारते रहे हैं वो हमकोफिर एक ... आगे पढ़ें...

कहने को तो 14 सितम्बर हिंदी दिवस है, पर अपने लिए तो चाँदी दिवस है . वैसे तो, अपने को कोई पूछता नही, पर हिंदी दिवस के लिए अपन दो-चार भाषण कबाड़ लेते हैं, तो अपनी पूछ परख हो जाती है. उसके लिए भी साल भर जुगाड़ करना पड़्ता है. सरकारी उपक्रमों तथा आकशवाणी ... आगे पढ़ें...

-------- राष्ट्रभाषा महान है --------भारत की पहचान है राष्ट्रभाषा महान है .संस्कृत का अवतार है,जन्-जन का दुलार है,संस्कृति का आधार है,देश से इसे प्यार है,भारत की यह शान है,राष्ट्रभाषा महान है .अँग्रेजों ने गुलाम बनाया,अँग्रेजी को यहाँ फैलाया ,शोषण का चक्र ... आगे पढ़ें...

ओ ! मैकाले के मानस-पुत्रो ! ! तुमने काट डाली करोड़ों जिह्वाएँ,क्योंकि, तुम्हें अँदेशा था कि-करोड़ो लोगों का समवेत स्वर, छीन लेगा तुम्हारा राजमुकुट , और तुम नंगे कर दिए जाओगेजनता के सामने,कि तुम अवशेष होअँग्रेजी साम्राज्य के . तुमने स्वतंत्रता बेचकर,पाई थी ... आगे पढ़ें...

सरलता और सहजता के नाम पर हिंदी को रोमन लिपि में लिखने का षड़्यंत्र रचा जा रहा है. हिंदी को रोमन लिपि में लिखना अवैज्ञानिक ही नही बल्कि अंग-भंग और बलात्कार करने जैसा घिनौना कर्म है. रोमन में हिंदी , वैसी ही लगती है, जैसे किसी भारतीय महिला को साड़ी के स्थान ... आगे पढ़ें...

----- भारत में अँग्रेजी के माध्यम से साँस्कृतिक परिवर्तन --------जब कोई देश विजेता बनता हे तो वह अपनी संस्कृति विजीत देश पर थोपने के लिए भाषा का सहारा लेता है. यही कारण है कि मुगलों ने फारसी और अँग्रेजों ने अँग्रेजी को हमारे देश पर लादा. भारत की भाषायी ... आगे पढ़ें...

--- गरीबों का आजादी-पर्व--मुफलिसों की चिट्ठी शहीदों के नाम है,देश तो स्वतंत्र है, पर, हम गुलाम हैं .अंगार पर चले हम,मझधार पर पले हम,रोशन हो देश अपना, मशाल-सा जले हम,पर व्यर्थ गई कुर्बानी,हर आँख में है पानी,बलिदानियों का कैसा हुआ अंजाम है?देश तो स्वतंत्र ... आगे पढ़ें...

आज के इस संघर्षपूर्ण माहोल में भूमंडलीकरण के नाम पर पूंजीवादी शक्तियाँ भारत के लोगों का आर्थिक शोषण कर रही है. देश के विकास के नाम पर उच्चवर्ग के लोगों का विकास किया जा रहा है. गरीब जनता के पास न तो रोजगार है और न ज्ञान है, क्योंकि अँग्रेजी की अनिवार्यता ... आगे पढ़ें...

धर्म के ज्वलामुखी जब धधकते हैं तब, मानवता अपना अस्तित्व खो देती है. लोग खून के प्यासे ही नहीं होते, अपितु, सब कुछ ध्वंस कर विजेता के रूप में अट्टहास करना चाहते हैं. आज धार्मिक व्यक्ति मिलना मुश्किल है, पर्, धार्मिक सेनाएँ मिल जाएगीं. धर्म के नाम पर नेता ... आगे पढ़ें...

सामाजिक और राजनीतिक जीवन का भविष्य होता नही, बनाया जाता है. विश्व के बुद्धिमान और शक्तिशाली राष्ट्र अपने हिसाब से दुनिया का भविष्य लिख रहे है. योजनाबद्ध तरीके से किसी देश में साँ‌स्कृतिक परिवर्तन कर, अपना अनुगामी, लाभ लेने के लिए बनाया जा रहा है. यदि कोई ... आगे पढ़ें...

मैं अपने अंतस में,आकाश की अनुभूति करने लगा हूं . अपनी आंखों से अदृश्य को देखने लगा हूँ .मुझे सुखद लगता है, भावनाओं का असीम ब्रह्मांड. मेरी जिजीविषा से मृत्यु, हास्यास्पद बन गई है.और आनंद का केसेट, पूरे जोर से बजता है. अंतस को प्रिय हो गया परिवर्तन, होने ... आगे पढ़ें...

राष्ट्रभाषा को अपनाना होगा, हमें सच्चा गणतंत्र लाना होगा.देश की पहचान हिंदी,देश की है शान हिंदी,झोंपड़ी का मान हिंदी,गरीबों का अरमान हिंदी,हिंदी को सम्मान दिलाना है,हमें सच्चा गणतंत्र लाना है. वीरगाथा गाने वाली, भक्तिरस बहाने वाली, शृंगार को महकाने वाली, ... आगे पढ़ें...

लोग संवेदनाहीन होकर जीते हैं, न अमृत, न विष, बस पानी पीते हैं. सुबह कुछ झर रहा था अंजुरी से,शाम को देखा तो हाथ रीते हैं.दिन भर फाडी उन्होंने अपनी जेबें, रात को फिर मजबूर होकर सीते हैं.जिंदगी बढ़ती जाती पर लोग ठहरे हैं, जिंदगी लोग क्यों मर कर जीते हैं ... आगे पढ़ें...