अंग्रेजी देश के 10% धनी लोगों का विकास करती है, पर हिंदी 70% दलित, शोषित, गरीब, तथा कमजोर लोगों का विकास करती है और हिंदी तथा भारतीय भाषाएं 100% लोगों का विकास करने में सक्षम है. अपनी तथा राष्ट्र की अस्मिता की रक्षा करने के लिए हिंदी का प्रयोग करने का संकल्प लेकर इस पोर्टल का विकास करें. हिंदी से संबंधित सब कुछ इसमें पाएंगें. दुनिया के सर्वाधिक खरबपति भारतीय मूल के लोग हैं, पर, सर्वाधिक गरीब भी भारत के लोग हैं. 20 करोड़ भारतीयों को ठीक से रोटी, कपडा और मकान नसीब नहीं है. भारत में किसी गरीब के घर के मटके में पीने का पानी नही होता है, पर, अमीर के घर में स्वीमिंगपूल पानी से भरा रह्ता है. ज्ञान अंग्रेजी में है और गरीब को अंग्रेजी आती नहीं. इसलिए सबका विकास करने के लिए हिंदी और भारतीय भाषाएं जरूरी है. क्या आप सहयोग करेंगे? करना ही होगा. कृपया सदस्य बन कर सहयोग करें. मोहन रावल
| पोर्टल निर्माता | mohanlal rawal |
| अंतिम बार संशोधित | 21 दिसंबर, 2010 9:23:10 PM IST |