--- गरीबों का आजादी-पर्व--मुफलिसों की चिट्ठी शहीदों के नाम है,देश तो स्वतंत्र है, पर, हम गुलाम हैं .अंगार पर चले हम,मझधार पर पले हम,रोशन हो देश अपना, मशाल-सा जले हम,पर व्यर्थ गई कुर्बानी,हर आँख में है पानी,बलिदानियों का कैसा हुआ अंजाम है?देश तो स्वतंत्र ...
आगे पढ़ें...