
राष्ट्रभाषा को अपनाना होगा,
हमें सच्चा गणतंत्र लाना होगा.
देश की पहचान हिंदी,
देश की है शान हिंदी,
झोंपड़ी का मान हिंदी,
गरीबों का अरमान हिंदी,
हिंदी को सम्मान दिलाना है,
हमें सच्चा गणतंत्र लाना है.
वीरगाथा गाने वाली,
भक्तिरस बहाने वाली,
शृंगार को महकाने वाली,
आजादी दिलाने वाली,
हिंदी का महत्व समझाना है,
हमें सच्चा गणतंत्र लाना है.
कबीरा की अलमस्ती हिंदी,
मीरा की है भक्ति हिंदी,
रसखान की रसधार हिंदी,
नज़ीर का है प्यार हिंदी,
हिंदी के गुण गाना है,
हमें सच्चा गणतंत्र लाना है.
संस्कृत की बेटी है हिंदी,
उर्दू की बहन है हिंदी,
इंगलिश की रिश्तेदार है,
सारा जग करता प्यार है,
हिंदी की ज्योति जलाना है,
हमें सच्चा गणतंत्र लाना है.
गांधी ने गुण इसका गाया,
संविधान ने इसे अपनाया,
राजेंद्रबाबू ने इसे महकाया,
टंडनजी ने इसे फैलाया,
हिंदी का अलख जगाना है,
हमें सच्चा गणतंत्र लाना है..
कवि- मोहन रावल

लोड हो रहा है...